अलका इन मुंबई ब्लागस्पॉट डॉट कॉम
12 /20 /2011
नमस्कार..
उससे पहले कि मैं मुंबई में रहने के अपने अनुभव आपसे बांटूं, मुझे अपना परिचय दे देना चाहिए। मेरा नाम अलका है। मैं भारतीय हूँ। मुझे मुंबई में आए ७ महीने बीत चुके हैं...
७ महीनो से इंडिया के एक बड़े से शहर मुंबई मैं हूँ..इसे देश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है...
भीड़ से भरा है ये शहर..आप जंहा भी जायेंगे किसी नदी की तरह उफनती भीड़ आपका पीछा नही छोड़ने वाली..जिन्हें अपने एकांत से प्यार है या जो अपनी दुनिया सिर्फ अपने इर्द-र्द बना लेते हैं उनके लिए इस शहर मैं कुछ नही है..ये शहर हमेशा जागता रहता है..आप समन्दर के किनारे जाकर शांति तलाश करना चाहो तो वंहा कई युगल मिल जायेंगे..बहुत सारे लोग उन्हें ताकते हुए भी मिल जायेंगे ..सब मिल जायेगा..पर शांति की तलाश आपकी अधूरी रह जाएगी..
आप मुझ से पूछें उससे पहले मैं खुद से पूछ लेती हूँ .,ये ब्लॉग मैं क्यों लिखना चाहती हूँ..? कुछ बातें हैं जो मैं बतना चाहती हूँ,.पर इससे बड़ा सच ये भी है कि मैं इस ब्लॉग के सहारे अपने मन मैं झांक लूँगी..कुछ पगडंडियाँ ऐसी होती हैं जिन पर चलने के लिए स्वंय को तलाशना पड़ जाता है..तो ये ब्लॉग बस इसी कोशिश का नाम है...या यूँ कंहू तो स्वयं के दरिया मैं डूबने-उतरने की एक कहानी भर..भीतर की यात्रएं कितनी सार्थक होती हैं ये तो आने वाला वक़्त ही बता सकता है..
मुझे पता ही नहीं था कि यहाँ इतनी बारिश होती है। शुरू में मैं अकसर कंही आते-जाते भीग जाती थी फिर मैं ने छाता खरीदा और हरदम उसे साथ रखना शुरू किया।
अभी मैंने MCA करना शुरू कर दिया है..और कोशिर कर रही हूँ जीवन मैं कुछ नया करने की..यूँ तो मुझे कम्प्यूटर पढना पसंद नही था..पर हाँ धीरे धीरे सीखने लगी हूँ तो अच्छा लगने लगा है..
पोस्टेड एट ६:३०पी.ऍम.
12 /20 /2011
नमस्कार..
उससे पहले कि मैं मुंबई में रहने के अपने अनुभव आपसे बांटूं, मुझे अपना परिचय दे देना चाहिए। मेरा नाम अलका है। मैं भारतीय हूँ। मुझे मुंबई में आए ७ महीने बीत चुके हैं...
७ महीनो से इंडिया के एक बड़े से शहर मुंबई मैं हूँ..इसे देश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है...
भीड़ से भरा है ये शहर..आप जंहा भी जायेंगे किसी नदी की तरह उफनती भीड़ आपका पीछा नही छोड़ने वाली..जिन्हें अपने एकांत से प्यार है या जो अपनी दुनिया सिर्फ अपने इर्द-र्द बना लेते हैं उनके लिए इस शहर मैं कुछ नही है..ये शहर हमेशा जागता रहता है..आप समन्दर के किनारे जाकर शांति तलाश करना चाहो तो वंहा कई युगल मिल जायेंगे..बहुत सारे लोग उन्हें ताकते हुए भी मिल जायेंगे ..सब मिल जायेगा..पर शांति की तलाश आपकी अधूरी रह जाएगी..
आप मुझ से पूछें उससे पहले मैं खुद से पूछ लेती हूँ .,ये ब्लॉग मैं क्यों लिखना चाहती हूँ..? कुछ बातें हैं जो मैं बतना चाहती हूँ,.पर इससे बड़ा सच ये भी है कि मैं इस ब्लॉग के सहारे अपने मन मैं झांक लूँगी..कुछ पगडंडियाँ ऐसी होती हैं जिन पर चलने के लिए स्वंय को तलाशना पड़ जाता है..तो ये ब्लॉग बस इसी कोशिश का नाम है...या यूँ कंहू तो स्वयं के दरिया मैं डूबने-उतरने की एक कहानी भर..भीतर की यात्रएं कितनी सार्थक होती हैं ये तो आने वाला वक़्त ही बता सकता है..
मुझे पता ही नहीं था कि यहाँ इतनी बारिश होती है। शुरू में मैं अकसर कंही आते-जाते भीग जाती थी फिर मैं ने छाता खरीदा और हरदम उसे साथ रखना शुरू किया।
अभी मैंने MCA करना शुरू कर दिया है..और कोशिर कर रही हूँ जीवन मैं कुछ नया करने की..यूँ तो मुझे कम्प्यूटर पढना पसंद नही था..पर हाँ धीरे धीरे सीखने लगी हूँ तो अच्छा लगने लगा है..
पोस्टेड एट ६:३०पी.ऍम.
सपनो की नगरी मैं अपने सपनो को सच करने की कशमकश में
ReplyDeleteबस येही ज़िन्दगी है हम लोगो की.....बहुत सी शुभकामनाये की आप मुंबई मैं अपने सारे सपने साकार कर सकें...
shanti apne khud ke mn me hoti he.....brhal Alka me to esi jgh hu jnha hr trh ki shanti he...jiwn ka sada pan he...prkrati ka aanchl he ye jgh...mumbai se bhi door...ghr se bahut door.
ReplyDeletejan ke khushi hui tum thik ho.....
ReplyDeleteo hi..knha ho aap..mujhe dhoond hi nikala...?
ReplyDeletemn ki santi to bahut pahle khatm ho gyee thi...bahr lalash kr rhi hun..shayd mil jaye..
han theek hun main..
ReplyDeletemumbai main nhi aayee mubai ne mujhe bula liya..dekhte hain kya hota hai..spne to adhoore rh hi jate hain ..unhen pura krne ki koshis hai ye jindagi..
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteaap wnha kisi job ke silsile main ho ya yun hi..?
ReplyDeletebank me hu...sandar jgh he sch kahte he log..south ka kashmir he ye
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