Thursday, December 22, 2011

जीवन के हैं रंग अनेक
मीठे-कडवे अनुभव
से भरा ये जीवन ..
क्या कुछ तेरा क्या कुछ मेरा  ?
क्षण भर की ये एक कहानी..

....पता है जब हमारा बचपन शुरू होता है तो हमें पता ही नही होता की ये कितना अनमोल है...हम अपने जीवन मैं चाहे कितने ही सोपान चढ़ लें .किसी भी ऊंचाई पर पहुँच जाएँ ,.पर जंहा से हमारे बचपन के दिन शुरू होते हैं हमारी स्कूली शिक्षा जंहा होती हैं हमारी साँसे भी वंही अटक जाती हैं..हमारी नब्ज वंही धडकती है..उसी स्कूल मैं..आप चाहे कितनी भी दूर चले जाओ ..पर अप वो दिन कभी नही भूल सकते जंहा अपने अपनी जिन्दगी की शुरआत की थी..
मैं यंहा आज मुंबई मैं हूँ काफी महीनो से पर आज भी अगर रात मैं जाग जाऊं तो मेरा मन मुझे घसीट के वंही ले जाता है आज भी डूबती रहती हूँ..उन्ही यादो के साए मैं..





1 comment:

  1. khush rha kro yar.....logo se dosti kro..achhe log hr jgh hote he....me bhi ynha akela hu..kbhi kbhi tnha masus hota he pr kya kr skte he.apne ko apne sath hamesha rkho-)

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